युवा सम्मेलन से पहले हैदराबाद में बीआरएस नेताओं को पुलिस ने किया नजरबंद
हैदराबाद में युवा सम्मेलन से पहले तेलंगाना पुलिस ने भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस ) की डिप्टी फ्लोर लीडर सविता इंद्रा रेड्डी और पार्टी नेता आरएस प्रवीन कुमार को नजरबंद किया है. बीआरएस नेताओं ने इस कार्रवाई की कड़ी आलोचना की और इसे असंवैधानिक बताया. समाचार संपादक देहाती विश्वनाथ की खास रिपोर्ट:-
हैदराबाद, 19 जुलाई 2026. हैदराबाद में युवा सम्मेलन से पहले तेलंगाना पुलिस ने भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस ) की डिप्टी फ्लोर लीडर सविता इंद्रा रेड्डी और पार्टी नेता आरएस प्रवीण कुमार को नजर बंद कर दिया है. भारत राष्ट्र समिति नेताओं ने इस कथित कार्रवाई की कड़ी आलोचना की और इसे लोकतंत्र पर हमला बताया. बीआरएस नेता आरएस प्रवीण कुमार ने एक वीडियो शेयर किया. उन्होंने अपने वीडियो संदेश में कहा, "पुलिस ने उन्हें 'युवा संग्राम सदस्सु ' में शामिल होने से रोकने के लिए नजरबंद किया है. "पुलिस की इस कार्रवाई की निंदा करते हुए, दोनों नेताओं ने सवाल उठाया कि तेलंगाना हाई कोर्ट से जनसभा की मंजूरी मिलने के बावजूद उन्हें कैसे नजर बंद किया जा सकता है.
उन्होंने इस कदम को मनमाना, लोकतंत्र के विरुद्ध और जनअधिकारों का हनन बताया. भारत राष्ट्र समिति ने शनिवार को हैदराबाद के पास सरूरनगर स्टेडियम में अपनी 'युवा संगम सभा' बुलाई थी. इसमें लगभग 10 हजार युवाओं के शामिल होने की खबर है. शुक्रवार को तेलंगाना हाई कोर्ट ने बीआरएस को जनसभा करने की सशर्त मंजूरी दी थी. कार्यक्रम की अनुमति देते हुए कोर्ट ने आयोजकों को निर्देश दिया था कि वह बिना सड़क जाम किए हुए शांतिपूर्ण ढंग से सम्मेलन करें और वक्तागण सभा में भड़काऊ भाषण से परहेज करें.
बीआरएस के कार्यकारी अध्यक्ष केटी रामा राव ने इस आदेश का स्वागत करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी की कन्वेंशन में बाधा डालने और बेरोजगार युवाओं की आवाज दबाने की कोशिश नाकाम हो गई है. उन्होंने कहा कि जहां राज्य सरकार ने मंजूरी देने से इनकार कर दिया था, वहीं हाई कोर्ट ने लोकतांत्रिक अधिकारों को बरकरार रखा.
सूत्र बताते हैं कि भारत राष्ट्र समिति ने यहां के सरूर नगर स्टेडियम को इसलिए चुना, क्योंकि कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा ने 2023 के विधानसभा चुनावों से पहले इसी मैदान में पार्टी का युवा घोषणा पत्र जारी किया था. बीआरएस ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार अपने युवा घोषणा पत्र के तहत युवाओं और बेरोजगारों से किए गए वादों को पूरा करने में नाकाम रही है. केटीआर ने कहा कि छात्र और बेरोजगार युवा चुनाव से पहले किए गए वादों को लागू करने में सरकार की विफलता पर लगातार सवाल उठा रहे हैं.