• किसी का कान फटा, किसी का कंधा..., एयर इंडिया की फ्लाइट में टर्बूलेंस से  घायल यात्रियों की आप बीती

    एयर इंडिया की फुकेट से दिल्ली आ रही फ्लाइट में भयानक टर्बूलेंस हुआ, जिससे कई यात्री घायल हो गए. इस अचानक टर्बूलेंस के कारण विमान तेजी से नीचे गिरा और यात्रियों के कान एवं गर्दन में चोटें आई. समाचार संपादक देहाती विश्वनाथ की  खास रिपोर्ट:-
    नई दिल्ली, 4 अगस्त 2026. एयर इंडिया की थाईलैंड से दिल्ली आ रही फ्लाइट में भयानक टर्बूलेंस होने से 12 यात्री घायल हो गए हैं. यह विमान थाईलैंड के फुकेट से दिल्ली आ रहा था. इस दौरान विमान टर्बूलेंस का शिकार हो गया. टर्बूलेंस इतना भयानक था कि किसी को कान में तो किसी को गर्दन में चोटें आई है. इनका उपचार कराया जा रहा है. 

    एक यात्री के भाई ने बताया कि, उनके भाई एयर इंडिया की फुकेट से दिल्ली आ रही फ्लाइट में थे. एआई 2379 में उड़ान के दौरान ऊंचाई पर अचानक टर्बूलेंस होने लगा, जिससे फ्लाइट तेजी से नीचे आ गई. हालांकि फ्लाइट के अंदर पैदा हुए प्रेशर ने यात्रियों पर बुरा असर डाला. दबाव के कारण उनके कान में इंजरी हुई है. इतनी तेजी से आने से उनका कान फट गया है.
    वहीं, एक यात्री ने कंधे में यह झटका लगने की बात कही है.

    इस संबंध में एयरलाइन ने बताया कि कुछ यात्रियों और चालक टीम के सदस्यों को  मामूली चोटें आई है. एहतियात के तौर पर उन्हें मेडिकल जांच और देखभाल के लिए एयरपोर्ट स्थित मेडिकल सुविधा केंद्र भेजा गया है, जहां एयर इंडिया की एयरपोर्ट टीम और मेडिकल स्टाफ  उनकी मदद कर रहे हैं. यात्रियों ने बताया कि दिल्ली में लैंडिंग से कुछ देर पहले विमान नीचे आने लगा  और हिचकोले खाने लगा. इससे यात्रियों में चीख पुकार मच गई. इस दौरान कई यात्रियों को चोटें आई. कुछ देर के लिए विमान में  अफरा तफरी मच गई. हालांकि, पायलट ने बड़ी मुश्किल से विमान को सफलतापूर्वक  लैंडिंग करवाया.

    एयर इंडिया के प्रवक्ता ने  बताया कि यात्रियों और चालक दल की सुरक्षा एवं उनका स्वास्थ्य हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है. बता दें कि  प्रभावित लोगों को हर संभव सहायता उपलब्ध कराई जा रही है और मामले की जांच में संबंधित अधिकारियों के साथ पूरा सहयोग किया जा रहा है.

    क्या होता है  एयर टर्बूलेंस?

    आसमान में एयर टर्बूलेंस तब पैदा होता है जब हवा का प्रवाह अनियमित हो जाता है. सामान्यतः हवा स्थिर परतों में बहती है, लेकिन कई कारणों से यह गड़बड़ा जाती है. धरती के गर्म होने से गर्म हवा ऊपर उठती है अब ठंडी हवा नीचे आती है, जिससे थर्मल डिस्टरबेंस बनता है. पहाड़ों से टकराने पर हवा ऊपर और नीचे लहरें बनाती हैं. ऊंचाई पर जेट स्ट्रीम जैसी तेज हवाओं के बीच गति के अंतर से भी अशांति उत्पन्न होती है.