जनेश्वर पर स्मारिका का विमोचन, संगोष्ठी समदर्शी हैं रामराज्य- समाजवाद : दीपक मिश्र
समाचार संपादक देहाती विश्वनाथ की खास रिपोर्ट..
लखनऊ, 6 अगस्त 2026. समाजवादी चिंतक जनेश्वर मिश्र की जयंती के उपलक्ष में सपा कार्यालय में आयोजित संगोष्ठी के दौरान 'छोटे लोहिया' जनेश्वर मिश्र पर केंद्रित स्मारिका का विमोचन करते हुए समाजवादी चिंतक दीपक मिश्र ने कहा कि समाजवाद और रामराज्य समदर्शी अवधारणाएं हैं. दोनों समावेशी, सर्वस्पर्शी तथा सांप्रदायिकता विरोधी हैं.
जनेश्वर मिश्र ने सदैव संकीर्ण और मौका परस्ती का विरोध किया. वे ऐसी व्यवस्था के समर्थक थे जिसमें गैर- बराबरी और सांप्रदायिक वैमस्यता न हो. भारत का इतिहास साक्षी है कि पंडित रामप्रसाद बिस्मिल और अशफाकउल्ला खान ने मिलकर आजादी की लड़ाई लड़ी. तुलसीदास विरचित श्री रामचरित मानस की अब्दुलर्रहीम न केवल रक्षा करते हैं अपितु उन्हें बरवै रामायण लिखने के लिए प्रेरित भी करते हैं. सैयद इब्राहिम खान उपाख्य रसखान पर लिखते हैं.
आज यह महान विरासत संकट और संक्रमण में है, जिसे बचाने की जिम्मेदारी हम सभी विशेषकर समाजवादियों की है. सरकारी दल का प्रश्न के उत्तर में संप्रदाय का कार्ड खेलना उचित नहीं. दीपक मिश्र ने कहा कि समाजवादी नीतियों से विचलन के कारण ही देश और उत्तर प्रदेश पर अनवरत कर्ज बढ़ रहा है. आज उत्तर प्रदेश पर 9.04 लाख करोड़ रुपए का कर्ज है. यूपी का हर आदमी 37 हजार के कर्ज में है. दीपक ने कहा कि लोहिया और जनेश्वर मिश्र द्वारा प्रतिपादित समाजवाद की प्रासंगिकता बढ़ी है.
संगोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे जिला अध्यक्ष ब्रजेश गौतम ने कहा कि जनेश्वर मिश्र जितने बड़े विचारक उतने ही बड़े आंदोलनकारी भी थे. इस मौके पर सपा के महानगर अध्यक्ष शब्बीर कुरैशी ने जनेश्वर मिश्र को देश की धरोहर बताया. आयोजित संगोष्ठी में सपा प्रदेश सचिव अवधेश यादव, प्रदेश सचिव दयाशंकर निषाद, नगीना साहनी, पूर्व विधायक यशपाल रावत, महानगर महासचिव ब्रजनाथ मौर्य, इंद्रदेव पासवान, संजय पहलवान, धीरज गुप्त, तहव्वर हुसैन, लालजी भारती, कार्यालय प्रभारी अली हुसैन मैना समेत कई समाजवादी नेताओं ने सहभाग किया. कार्यक्रम का संचालन जिला महासचिव रामनाथ यादव ने किया.