• दीपक प्रकाश की मंत्री पद पर दोबारा नियुक्ति मामले में सुप्रीम कोर्ट ने जारी किया नोटिस

    बिहार के पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश की  दोबारा मंत्री बनने के मामले पर सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. अदालत ने इस मामले में बिहार सरकार, चुनाव आयोग और दीपक प्रकाश को नोटिस जारी किया है. समाचार संपादक देहाती विश्वनाथ की विशेष रिपोर्ट:-

    पटना, 16 जून 2026. सुप्रीम कोर्ट ने बिहार के पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश की मंत्री पद पर दोबारा नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका पर नोटिस जारी किए हैं. यह नोटिस  बिहार सरकार, मंत्री दीपक प्रकाश और  चुनाव आयोग को भेजे गए हैं. सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए जारी नोटिस में कहा है कि इस याचिका में दीपक प्रकाश को विधायक चुने बिना बिहार का पंचायती राज मंत्री दोबारा बनाए जाने को चुनौती दी गई है.

    मंत्री बनने के लिए सिर्फ एक बार मिल सकती है छूट 
    याचिकाकर्ता राकेश कुमार सिंह का तर्क है कि दीपक प्रकाश विधानसभा या विधान परिषद के किसी भी सदन के सदस्य नहीं है, इसलिए राज्य सरकार के मंत्रालय में कोई पद नहीं संभाल सकते. याचिका में कहां गया है  कि संविधान के अनुच्छेद 164(4) के मुताबिक, कोई व्यक्ति जो विधायक या विधान पार्षद नहीं है, वह लगातार 6 महीने तक मंत्री रह सकता है, लेकिन इस दौरान उसे राज्य विधानमंडल की सदस्यता हासिल करनी होगी. यह छूट सिर्फ एक बार मिलने वाला मौका है लेकिन सरकार बदलने पर इसे दोबारा इस्तेमाल नहीं किया जा सकता.

    दीपक प्रकाश को दोबारा मंत्री बनाया गया

    याचिका के मुताबिक, दीपक प्रकाश को तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने  20 नवंबर 2025 को मंत्री बनाया था, लेकिन वह विधानसभा के सदस्य नहीं थे. 15 अप्रैल 2026 को नीतीश सरकार गिर गई, जिस मंत्री परिषद भंग हो गई. 22 दिनों के अंतराल के बाद 7 मई को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली नई सरकार ने दीपक प्रकाश को फिर से मंत्रिमंडल में शामिल कर लिया. 20 नवंबर 2025 को पहली नियुक्ति से दोबारा चुने जाने के लिए 6 महीने का समय 20 मई 2026 को समाप्त हो गया. बावजूद इसके मंत्री पद पर बने हुए हैं.

    चुनावी जवाबदेही के सिद्धांतों को पहुंचेगा नुकसान

    याचिकाकर्ता ने कहा कि ऐसे में दोबारा नियुक्त करके उन्हें अतिरिक्त समय देने की कोशिश की गई है. उन्होंने यह भी तर्क दिया कि बिना चुने गए व्यक्तियों को बार-बार मंत्री पद पर नियुक्ति करने की अनुमति देने से संसदीय लोकतंत्र, प्रतिनिधि, सरकार सामूहिक जिम्मेदारी और चुनावी जवाबदेही के सिद्धांतों को नुकसान पहुंचेगा. सोमवार को सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की दलील सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार, मंत्री दीपक प्रकाश और चुनाव आयोग को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है.