• ईमानदारी हो तो ऐसी, बस में मिले 24 हजार, कंडक्टर ने नहीं छुआ एक रुपया... दो साल बाद मिली बुजुर्ग महिला

    वाशिम में  एसटी बस कंडक्टर राजू वानी ने ईमानदारी की मिसाल पेश की है. उन्होंने बस में मिले 24 हजार रुपए कैश, दवाइयों और मेडिकल दस्तावेजों से भरा बैग 2 साल बाद उसे बुजुर्ग महिला को लौटाया. समाचार संपादक देहाती विश्वनाथ की यह खास रिपोर्ट:-

    वाशिम, 13 अगस्त 2026. आज के समय में अगर सड़क पर किसी को 100-200 रुपए भी मिल जाएं तो बहुत कम लोग उसके असली मालिक तक पहुंचाने की कोशिश करते हैं. लेकिन महाराष्ट्र के  वाशिम में एक एसटी बस कंडक्टर ने ईमानदारी की ऐसी मिसाल पेश की है, जिसे सुनकर आप भी उसकी तारीफ किए बिना नहीं रह पाएंगे. बस में मिले 24 हजार रुपए, दवाइयों और जरूरी मेडिकल दस्तावेजों से भरा बैग बस कंडक्टर ने खुद के पास रखने के बजाय बस डिपो में जमा कर दिया. इतना ही नहीं, वह करीब 2 साल तक उस बुजुर्ग महिला को ढूंढते रहे, जिनकी मेहनत की कमाई थी. आखिरकार किस्मत ने उन्हें फिर उसी बस में मिला दिया और बस कंडक्टर ने उक्त बुजुर्ग महिला को उसके 24 हजार रुपए लौटा दिए.

    बस में छूट गया था 24 हजार रुपए वाला बैग
    मामला 2024 का है. छत्रपति संभाजी नगर से वाशिम के बीच सफर कर रही एक बुजुर्ग महिला का बैग बस में छूट गया था. उस बैग में करीब 24 हजार रुपए कैश, दवाइयां और मेडिकल से जुड़े जरूरी दस्तावेज थे. बस में ड्यूटी कर रहे  एसटी बस कंडक्टर राजू  वानी को जब यह बैग मिला तो उन्होंने बिना किसी लालच के उसे सुरक्षित रखा और पूरी रकम और सामान  वाशिम बस डिपो के प्रबंधक के पास जमा करा दिया. बैग में महिला की पहचान से जुड़ी जानकारी भी मिली थी. इससे कंडक्टर को उम्मीद थी कि किसी दिन उसकी मालकिन जरूर मिल जाएगी.

    2 साल तक महिला को ढूंढते रहे राजू वानी
    आमतौर पर  इतनी बड़ी रकम मिलने के बाद कुछ समय तक मलिक का इंतजार करने के बाद लोग उम्मीद छोड़ देते हैं. लेकिन राजू  वानी ने ऐसा नहीं किया. उन्होंने करीब 2 साल तक बुजुर्ग महिला को ढूंढने की कोशिश जारी रखी. उनके लिए यह सिर्फ बस में मिला सामान नहीं था, बल्कि किसी की मेहनत की कमाई और इलाज से जुड़ा जरूरी सामान था. फिर 2 साल बाद ऐसा संयोग बना कि जिस महिला को वे इतने समय से तलाश रहे थे, वह खुद इस बस में आ गई.

    आईडी कार्ड पर नाम देखा तो कंडक्टर को हुआ शक

    यह घटना उस समय की है जब राजू वानी वाशिम से अकोला जा रही बस में ड्यूटी कर रहे थे. बस में एक बुजुर्ग महिला टिकट लेने पहुंची. कंडक्टर ने उनका पहचान पत्र देखा तो उस पर लिखा नाम देखकर उन्हें शक हुआ कि  कहीं यही वह महिला तो नहीं है, जिसका बैग करीब 2 साल पहले बस में छूट गया था. उन्होंने महिला से बेहद सहज तरीके से पूछा कि क्या उन्होंने कभी बस में पैसे या जरूरी कागजात वाला कोई बैग खोया था? सवाल सुनते ही महिला को 2 साल पुरानी घटना याद आ गई. उन्होंने बताया कि उनका 24 हजार रुपए और दवाइयों वाला बैग बस में छूट गया था. इसके बाद कंडक्टर को यकीन हो गया कि वह इस महिला के सामने खड़े हैं, जिसे वह इतने समय से तलाश रहे थे.

    मेहनत की कमाई वापस मिली तो चेहरे पर आई खुशी

    राजू वानी बुजुर्ग महिला को बस डिपो ले गए और वहां सुरक्षित  रखे 24 हजार रुपए, दवाइयां और जरूरी दस्तावेज उन्हें सौंप दिए. 2 साल बाद अपनी मेहनत की कमाई वापस  पाकर बुजुर्ग महिला के चेहरे पर खुशी साफ नजर आई. वहीं, वाशिम एसटी बस डिपो के प्रबंधन ने भी राजू वानी को ईमानदारी और जिम्मेदारी की सराहना की  और उन्हें सम्मानित किया. आज जब छोटी सी रकम को लेकर भी लोग ईमानदारी भूल जाते हैं ऐसे में 24 हजार रुपए  2 साल तक सुरक्षित रखकर उसके असली मालिक को वापस लौटना निश्चित तौर पर इंसानियत और ईमानदारी की एक बड़ी मिसाल है.