• संकट की घड़ी में रमला बाई का सहारा बनी राष्ट्रीय परिवार सहायता योजना

    ग्राम पंचायत ने घर पहुंचकर की मदद, दफ्तरों के चक्कर लगाए बिना खाते में सहायता राशि पहुंची।

    रायपुर, 26 सितम्बर 2026। जीवन में कभी-कभी अचानक आई विपत्ति पूरे परिवार को मुश्किलों में डाल देती है। ऐसे कठिन समय में शासन की जनकल्याणकारी योजनाएं जरूरतमंद परिवारों के लिए संबल बनती हैं। कसही गांव की रमला बाई पटेल के जीवन में भी राष्ट्रीय परिवार सहायता योजना ने मुश्किल वक्त में ऐसा ही सहारा दिया।

    3 सितंबर 2025 को रमला बाई के पति हुबलाल पटेल का अचानक निधन हो गया। पति को खोने का दुख तो था ही, परिवार के कमाने वाले सदस्य के चले जाने से उनके सामने आर्थिक संकट भी खड़ा हो गया। घर की रोजमर्रा की जरूरतें कैसे पूरी होंगी और परिवार का जीवन-यापन कैसे चलेगा, इसकी चिंता रमला बाई को सताने लगी। सरकारी योजनाओं की पर्याप्त जानकारी नहीं होने के कारण उन्हें यह भी पता नहीं था कि ऐसी परिस्थिति में उन्हें शासन से आर्थिक सहायता मिल सकती है।

    इस कठिन समय में ग्राम पंचायत कसही ने आगे बढ़कर रमला बाई की मदद की। सरपंच योगेश्वरी गायकवाड़ और ग्राम पंचायत सचिव स्वयं उनके घर पहुंचे। उन्होंने परिवार को ढांढस बंधाया और राष्ट्रीय परिवार सहायता योजना के बारे में जानकारी दी। रमला बाई का रिकॉर्ड देखने पर उनका नाम बीपीएल सर्वे वर्ष 2002-03 में दर्ज पाया गया। इसके बाद पंचायत प्रतिनिधियों ने आवेदन भरने से लेकर आवश्यक दस्तावेज और अन्य औपचारिकताएं पूरी कराने में सहयोग किया।

    गांव में ही पूरी हुई प्रक्रिया, खाते में पहुंचे 20 हजार रुपए

    ग्राम पंचायत की पहल से रमला बाई को योजना का लाभ लेने के लिए ब्लॉक अथवा जिला मुख्यालय के कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़े। आवश्यक प्रक्रिया ग्राम पंचायत स्तर पर ही पूरी की गई और राष्ट्रीय परिवार सहायता योजना के तहत 20 हजार रुपए की आर्थिक सहायता सीधे उनके बैंक खाते में अंतरित की गई।

    संकट की घड़ी में मिली इस सहायता ने रमला बाई को बड़ी राहत दी। उन्होंने बताया कि पति के निधन के बाद जब परिवार के सामने आर्थिक मुश्किलें थीं, तब यह राशि रोजमर्रा की आवश्यकताओं को पूरा करने में मददगार बनी। योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए उन्हें कहीं भटकना नहीं पड़ा और गांव में ही पूरी प्रक्रिया हो गई।