• टीएमसी टूट की कगार पर! रितब्रत बनर्जी और सांदीपन साहा पहुंचे विधानसभा, 59 विधायकों के समर्थन का दावा

    टीएमसी ने पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में अपने दो विधायकों, रितब्रत बनर्जी और संदीपन साहा को निलंबित कर दिया था. सूत्र बताते हैं कि बागी गुट रितब्रत बनर्जी को विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बनाने...

    कोलकाता, 3 जून 2026. पश्चिम बंगाल से बहुत बड़ी खबर सामने आ रही है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, तृणमूल कांग्रेस से सस्पेंड किए गए बागी विधायक रितब्रत बनर्जी और संदीपन साहा विधानसभा पहुंचे और स्पीकर से मुलाकात की. बागी विधायकों ने 50 से अधिक विधायकों के समर्थन का दावा भी किया. इस दावे के बाद अब टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी की मुश्किलें बढ़ती हुई नजर आ रही है. सूत्र बताते हैं कि टीएमसी का बागी गुट रितब्रत बनर्जी को विधानसभा में नया नेता प्रतिपक्ष बनाने की तैयारी कर रहा है.

    दरअसल, बीते सोमवार को टीएमसी ने रितब्रत बनर्जी और संदीपन  साहा को पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में निष्कासित कर दिया था. ये दोनों नेता ने आरोप लगाया था कि 6 मई को सदन का नेता प्रतिपक्ष, उप नेता प्रतिपक्ष, और मुख्य सचेतक के नामों को मंजूरी देने वाले टीएमसी के प्रस्ताव पत्र में कई विधायकों के हस्ताक्षर फर्जी तरीके से किए गए थे. उनका दावा था कि उन दोनों के हस्ताक्षर भी फर्जी बनाए गए थे. इससे पहले पार्टी से निष्कासन के एक दिन बाद  दोनों नेताओं को कुछ टीएमसी विधायकों के संपर्क में देखा गया था.

    खबरों के मुताबिक, रितब्रत और संदीपन ने कोलकाता स्थित विधायक हॉस्टल में पार्टी के कई विधायकों से मुलाकात की. इसके बाद से ही टीएमसी में नया गुट बनने की अटकलें तेज हो गई थी. हालांकि, रितब्रत बनर्जी ने पार्टी में पनपते मतभेद की तरफ इशारा करते हुए शीर्ष नेतृत्व पर सवाल उठाए थे. उन्होंने कहा था कि पार्टी को ममता बनर्जी के हाथों से हाईजैक कर लिया गया है. इशारा  अभिषेक बनर्जी की ओर था.

    ममता बनर्जी के सामने बड़ी चुनौती 

    हाल में हुए विधानसभा चुनावों में तृणमूल कांग्रेस 294 में से महज 80 सीटें ही जीत पाई थी. ऐसे में  रितब्रत बनर्जी के 50 विधायकों के समर्थन के दावे के बाद का सियासी गणित पूरा बदल सकता है. टीएमसी इस वक्त ठीक उसी मोड़ पर खड़ी है, जहां साल 2022 में महाराष्ट्र में शिवसेना खड़ी थी. दलबदल कानून के मुताबिक, किसी भी पार्टी में कानूनी तौर पर विभाजन को मान्यता देने और विधायकी बचाने के लिए कम से कम दो तिहाई विधायकों का एक साथ अलग होना जरूरी है.

    टीएनसी के 80 विधायकों में से दो तिहाई का आंकड़ा 54 विधायक होता है. यदि रितब्रत बनर्जी का यह दावा सच होता है, तो बागी गुट बिना अपनी सदस्यता  गंवाए असली टीएमसी होने का दावा ठोक सकता है. जबकि ममता बनर्जी की पार्टी से मुख्य विपक्षी दल का तमगा भी छीन सकता है. नियमों के मुताबिक, सदन में मुख्य विपक्षी दल का दर्जा बनाए रखने के लिए किसी भी पार्टी के पास कम से कम 29 विधायकों का समर्थन होना अनिवार्य है. अगर टीएमसी में बड़ी टूट होती है तो यह दर्जा भी छीन सकता है.

    आज टूट जाएगी ममता बनर्जी की पार्टी!' असली टीएमसी' के साथ विधायक चले अलग गुट बनाने

    ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस टूट की कगार पर है. अटकलें हैं कि पार्टी के दो फाड़ हो सकते हैं और करीब 60 विधायक रितब्रत बनर्जी को समर्थन देने की तैयारी कर रहे हैं. हालांकि, इसे लेकर आधिकारिक रूप से कुछ नहीं कहा गया है. संभावनाएं हैं कि आज बुधवार को विधायक एकजुट होकर पश्चिम बंगाल विधानसभा अध्यक्ष को समर्थन पत्र सौंप सकते हैं. अगर ऐसा होता है, तो टीएमसी 60 और 20 के गुट में बंट जाएगी और ममता बनर्जी गुट से विपक्ष का दर्जा भी छिन जाएगा.

    विरोध प्रदर्शन में नहीं पहुंचे सांसद और विधायक

    खबर है कि ममता बनर्जी ने विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस की हार के बाद मंगलवार को पहली बड़ी राजनीतिक लामबंदी की, एस्प्लेनेड के वाई - चैनल पर आयोजित धरना कार्यक्रम में बहुत कम भीड़ और कई सांसदों -- विधायकों की गैर मौजूदगी चर्चा का विषय बनी हुई है.