"आपके आंदोलन से 'आप ' का जन्म हुआ, क्या इस बार भी...," सवाल पर ये बोले अन्ना हजारे
नीट पेपर लीक विवाद और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिसिया कार्रवाई को लेकर समाजसेवी अन्ना हजारे में मीडिया से बातचीत की. इस दौरान आम आदमी पार्टी (आप ) के जन्म से जुड़ा सवाल भी पूछा गया तो वह नाराज हो गए. गुरुवार से वे जंतर- मंतर में मौन व्रत वे छात्रों के समर्थन में मौन व्रत शुरू कर दिया है.
नई दिल्ली, 23 जुलाई 2026. अन्ना हजारे ने नीट पेपर लीक और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर संसद मार्च कर रहे छात्रों पर पुलिसिया कार्रवाई के मुद्दे पर मीडिया से बातचीत के दौरान जब उनसे सवाल पूछा गया कि उनके आंदोलन से आम आदमी पार्टी का जन्म हुआ था और क्या मौजूदा छात्र आंदोलन से भी ऐसी किसी राजनीतिक दल का जन्म हो सकता है, तो वो नाराज हो गए. गुरुवार से अन्ना हजारे जंतर मंतर में छात्रों के समर्थन में मौन व्रत प्रारंभ कर दिया है।
अन्ना हजारे ने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि वो इस बारे में कुछ नहीं जानते और इसके बाद मीडिया कर्मियों से अलग हो गए. उन्होंने छात्रों के मुद्दे को लेकर पीएम नरेंद्र मोदी को लिखे चिट्ठी पर भी बात की. अन्ना हजारे ने कहा कि हिंसा से कभी समाधान नहीं निकलता और नरेंद्र मोदी देश के बड़े सम्मानित नेता हैं. उन्हें यह समझना चाहिए कि हिंसा कोई रास्ता नहीं है. वो सर्वोच्च पद पर हैं, इसलिए मैंने उन्हें पत्र लिखा. अन्ना हजारे ने कहा कि मैंने अपने जीवन में 22 आंदोलन किए, लेकिन उनमें कभी हिंसा नहीं हुई. इस आंदोलन में जो हुआ, वह गलत हुआ. आंदोलन हमेशा अहिंसा के रास्ते होना चाहिए.
अन्ना हजारे ने पीएम को लिखा पत्र
अन्ना हजारे ने बीते दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखे पत्र में कहा कि दिल्ली में छात्रों के चल रहे विरोध प्रदर्शन के दौरान हिंसा और पुलिसिया करवाई बेहद दुखद थी. उन्होंने जोर देकर कहा कि लोकतंत्र में टकराव के बजाय "बातचीत" हमेशा बेहतर होती है. टकराव के बजाय बातचीत का रास्ता अपनाया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि देश के लाखों युवा बेरोजगारी और पेपर लीक से परेशान हैं, जिसे केवल कानून - व्यवस्था की समस्या मानने की बजाय जनता के आक्रोश के तौर पर देखा जाना चाहिए.
अन्ना हजारे ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग का समर्थन करते हुए लिखा कि किसी मंत्री का इस्तीफा लेने से सरकार सत्ता नहीं खोती हैं. बल्कि इससे अन्य मंत्रियों के बीच एक कड़ा और स्पष्ट संदेश जाता है कि जिम्मेदारी न निभाने पर पद छोड़ना पड़ेगा. उन्होंने कहा कि केवल निचले स्तर के कर्मचारियों पर कार्रवाई करने के बजाय वरिष्ठ पदों पर बैठे लोगों की अंतिम जवाबदेही तय होनी चाहिए.
कॉकरोच जनता पार्टी का प्रोटेस्ट, अन्ना आंदोलन से कितना अलग?
कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रदर्शन के दौरान सोमवार को जंतर मंतर पर हजारों युवाओं की भीड़ उमड़ी तो लोगों की डेढ़ दशक पहले हुए अन्ना हजारे आंदोलन की यादें ताजा हो गई. हालांकि, दोनों आंदोलनों में कुछ समानताएं होने के बावजूद काफी भिन्नताएं हैं. संसद के मानसून सत्र के पहले दिन दिल्ली पुलिस के तमाम प्रयासों के बावजूद बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी जंतर मंतर से लेकर संसद भवन के निकट तक एकत्र होने में सफल रहे.
पुलिस ने करीब 50 हजार के करीब छात्र युवाओं के उसे इलाके में पहुंचने का दावा किया है, लेकिन वास्तविक संख्या 70 से 80 हजार तक होने का अनुमान है. इससे सरकार के माथे पर चिंता की लकीरें भी हैं. अन्ना हजारे और सीजीपी के आंदोलन में कुछ समानताएं हैं. दोनों आंदोलन सत्ता के खिलाफ थे. इनमें युवा बड़ी संख्या में जुड़े थे. दोनों आंदोलन भीड़ जुटाने में सफल रहे थे, लेकिन इनमें कई भिन्नताएं भी हैं.
सीजेपी और अन्ना हजारे के आंदोलन में अंतर
● बुजुर्ग गांधीवादी नेता अन्ना हजारे के नेतृत्व में हुए आंदोलन में तब सोशल मीडिया की भूमिका करीब करीब नगन्य थी. वहीं सीजेपी आंदोलन जेन जी और सोशल मीडिया प्रेरित हैं.
● अन्ना आंदोलन से तत्कालीन यूपीए सरकार को भारी नुकसान हुआ था. हालांकि, सीजेपी का आंदोलन अभी सीमित है तथा सोनम वांगचुक के अलावा कोई और सेलिब्रिटी उससे जुड़ नहीं पाया है.
● अन्ना आंदोलन राजनीतिक में उच्च स्तर पर व्याप्त भ्रष्टाचार के खिलाफ था. जबकि सीजेपी का आंदोलन नीट परीक्षा और युवाओं के मुद्दों तक सीमित हैं, इसलिए दोनों की व्यापकता में फर्क है.