• पंचायत से लेकर राष्ट्रपति पद तक लड़े 280 चुनाव, इंदिरा- राजीव के खिलाफ भी ठोकी थी ताल, भागलपुर के 'धरती पकड़' का निधन

    बिहार में भागलपुर  के 'धरती पकड़ ' उर्फ नागरमल बाजोरिया का 3 सितंबर गुरुवार को 96 साल की आयु में निधन हो गया. वे पंचायत से राष्ट्रपति पद तक 280 से अधिक चुनाव लड़ने और इंदिरा- राजीव गांधी के खिलाफ ताल ठोकने के लिए जाने जाते थे. जिंदगी भर मैदान में डटे रहे, कभी मन से नहीं हारे, आखिर मौत ने उन्हें पराजित किया. भागलपुर के 'धरती पकड़' नागरमल बाजोरिया नहीं रहे. समाचार संपादक देहाती विश्वनाथ की खास रिपोर्ट:-

    भागलपुर, 4 सितंबर 2026. चुनावी राजनीति में हार - जीत से परे रहकर केवल लोकतंत्र के पर्व में भागीदारी निभाने वाले और जीवटता की अनूठी मिसाल कायम करने वाले भागलपुर के एमपी द्विवेदी मार्ग निवासी नागरमल बाजोरिया उर्फ 'धरती पकड़ ' का निधन 3 सितंबर गुरुवार को हो गया. 96 वर्ष की आयु में उन्होंने राजधानी पटना में अंतिम सांस ली. उम्र के इस आखिरी पड़ाव पर वे वृद्धावस्था संबंधी स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे थे. उनके देहावसान की खबर मिलते ही सिल्क सिटी के सामाजिक और राजनीतिक गलियारों में शोक की लहर दौड़ गई है. उनका पार्थिव शरीर पटना से भागलपुर लाया जा रहा है, जहां शुक्रवार को बरारी स्थित श्मशान घाट पर उनका अंतिम संस्कार संपन्न होगा.

    नागरमल बाजोरिया जिंदगी भर चुनावी मैदान में पूरी शिद्दत के साथ डटे रहे. हर चुनाव में वे कभी मन से पराजित नहीं हुए. मैदान में उतारने का उनका हौसला कभी डिगा नहीं. चुनावी नतीजे की परवाह किए बिना बार-बार ताल ठोकने वाले इस अदम्य योद्धा को आखिरकार मौत ने पराजित कर दिया.

    चुनावी दावेदारी और शारीरिक स्थिति एवं जज्बा

    93 वर्ष की आयु में उन्होंने एक साथ तीन लोकसभा सीटों - पुरानी दिल्ली, रायबरेली  और पटना साहिब से चुनाव लड़ने का फैसला किया था. उस समय वे मुश्किल से चल और बोल पाते थे एवं उम्र संबंधी भूलने की बीमारी से जूझ रहे थे, फिर भी चुनाव प्रचार के लिए उन्होंने एक मारुति वैन खरीदी थी.

    चुनावी रिकॉर्ड
    नगर निकाय (वार्ड ) से लेकर राष्ट्रपति पद तक वे 280 से अधिक बार चुनावी मैदान में उतर चुके थे. चुनाव लड़ने की इसी मजबूत इरादे के कारण उन्हें भागलपुर में 'धरती पकड़' के नाम से जाना जाता था. वे और उनका परिवार वर्ष 1930 में पाकिस्तान के लाहौर से आकर भागलपुर में बस गए थे.

    उनका दर्शन
    उनका कहना था कि चुनाव जीतना कभी उनकी प्राथमिकता नहीं रहा, उनका मुख्य मकसद लोगों को लोकतंत्र में 'एक आम आदमी की ताकत' का एहसास करना था. वर्ष 2020 तक सामने आए आंकड़ों के मुताबिक, वे अपने जीवनकाल में 281 से अधिक चुनाव लड़ चुके थे. ग्राम पंचायत के वार्ड सदस्य से लेकर विधानसभा, विधान परिषद, लोकसभा और देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद राष्ट्रपति तक के चुनाव में उन्होंने हमेशा पूरे उत्साह से नामांकन दाखिल किया. चुनावी आंकड़ों में उन्हें कभी जीत नसीब नहीं हुई, लेकिन लोकतंत्र के प्रति उनका समर्पण और लड़ने का जज्बा हमेशा देशव्यापी चर्चा का विषय बना रहा.

    शुक्रवार सुबह बरारी घाट पर होगा अंतिम संस्कार
    नागरमल बाजोरिया भागलपुर के निवासी थे. वे अपने पीछे तीन पुत्र सतीश कुमार, अजय कुमार और दिलीप कुमार बाजोरिया सहित भरा - पूरा परिवार छोड़ गए हैं.

    नागरमल बाजोरिया के चुनाव लड़ने का अंदाज हमेशा लीक सेहत कर रहा. उनके दादा - ससुर के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए कारोबारी आलोक कुमार अग्रवाल कहते हैं कि 2025 के आसपास एक चुनाव के दौरान उन्होंने भ्रष्टाचार के विरोध में अनोखा प्रदर्शन किया था. वे नामांकन रैली में राजनेताओं की तस्वीरों वाली तख्तियां गधों के गले में डालकर निकले थे, जो उस समय पूरे देश में चर्चा का विषय बन गई थी.