• पामेड़-रासपल्ली की दूरी 230 किमी से घटकर हुई 100 किमी, बस्तर में बदलाव की दिखने लगी तस्वीर

    रायपुर, 22 जुलाई 2026। छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में पामेड़-रासपल्ली क्षेत्र की सड़क ने दशकों से कटी इन सुदूर बस्तियों की तस्वीर पूरी तरह बदल दी है। लगभग 50 वर्षों बाद जिला मुख्यालय से पामेड़ का सीधा जुड़ाव हुआ है, जिससे इन दुर्गम इलाकों में पहली बार यात्री बसें चलने लगी हैं। पहले पामेड़ जाने के लिए तेलंगाना (चेरला) होकर लगभग 220 किमी लंबा सफर तय करना पड़ता था। सड़क बहाल होने के बाद से अब आवापल्ली और कुंडापल्ली होते हुए बीजापुर से दूरी मात्र 100 किमी रह गई है।

    साय सरकार दूरस्थ और अंदरूनी क्षेत्रों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए लगातार कार्य कर रही है। इसी दिशा में बीजापुर जिले के उसूर विकासखंड के सुदूर क्षेत्र में निर्मित पामेड़-रासपल्ली सड़क ग्रामीणों के लिए विकास और सुविधा की नई राह बन गई है। वर्ष 2016-17 (बैच-2) में स्वीकृत 10 किमी लंबी पामेड़-रासपल्ली सड़क का मुरुमीकरण कार्य पूरा हो चुका है। सड़क बनने से लंबे समय से आवागमन की कठिनाईयों का सामना कर रहे ग्रामीणों को बड़ी राहत मिली है।

    230 किमी की दूरी अब करीब 100 किमी

    पहले पामेड़ पहुंचने के लिए ग्रामीणों को तेलंगाना के चेरला होते हुए करीब 230 किलोमीटर की लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी। इससे ग्रामीणों का समय और धन दोनों अधिक खर्च होते थे। अब पामेड़-रासपल्ली सड़क बनने से यह दूरी घटकर करीब 100 किलोमीटर रह गई है। इससे ग्रामीणों के लिए आवागमन आसान, तेज और सुविधाजनक हो गया है।

    हाट- बाजार, अस्पताल और स्कूल तक आसान पहुंच

    पहले यह मार्ग घने जंगलों के बीच से गुजरने वाली पगडंडी जैसा था। सड़क बनने के बाद आसपास की अंदरूनी बसाहटों के लोगों को हाट-बाजार, ब्लॉक मुख्यालय, अस्पताल और अन्य जरूरी सेवाओं तक पहुंचने में सुविधा मिल रही है। स्कूली बच्चों के लिए भी विद्यालय तक पहुंचना अब अधिक आसान और सुरक्षित हो गया है।

    बुनियादी सुविधाओं का हो रहा विस्तार

    पामेड़-रासपल्ली सड़क के निर्माण से क्षेत्र में विकास कार्यों को नई गति मिली है। बिजली, पेयजल और मोबाइल नेटवर्क जैसी बुनियादी सुविधाओं का विस्तार तेजी से हो रहा है। ग्रामीण अब जिला मुख्यालय और प्रशासनिक तंत्र से बेहतर तरीके से जुड़ रहे हैं तथा विभिन्न शासकीय योजनाओं और सेवाओं का लाभ प्राप्त कर रहे हैं।