• राजनीति में आना मेरी गलती थी, पूर्व डिप्टी स्पीकर आशीष बनर्जी के सुसाइड नोट में छलका दर्द

    पश्चिम बंगाल के पूर्व डिप्टी स्पीकर और तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता आशीष बनर्जी की  मौत के बाद सामने आए कथित सुसाइड नोट ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं. नोट में आशीष बनर्जी ने राजनीति में अपने लंबे सफर और पार्टी के भीतर की हालातों को लेकर दर्द जाहिर किया. समाचार संपादक देहाती विश्वनाथ की यह खास रिपोर्ट:-

    कोलकाता, 16 अगस्त 2026. बहुत से लोगों का सपना होता है कि वह राजनीति में आएं और ऊंचा मकाम हासिल करें लेकिन पश्चिम बंगाल विधानसभा के पूर्व उपाध्यक्ष आशीष बनर्जी ने अपने सुसाइड नोट में जो दर्द बयां किया है उसने राजनीति में ईमानदार छवि के लोगों को एक बार फिर से सोचने पर मजबूर कर दिया है. इस नोट में आशीष बनर्जी ने राजनीति में अपने लंबे सफर, भ्रष्टाचार के आरोपों और उन्हें बदनाम किए जाने के प्रयासों के जिक्र किया और यह लिखा कि राजनीति में आना मेरी गलती थी.

    कभी किसी भ्रष्टाचार में शामिल नहीं रहा
    आशीष बनर्जी ने लिखा, "मैं छात्र जीवन से ही राजनीति से जुड़ा रहा हूं. मैं कभी किसी तरह के भ्रष्टाचार में शामिल नहीं रहा. मैं वर्धमान यूनिवर्सिटी में छात्र संगठन का महासचिव बना. वहां भी, मैं कभी किसी भ्रष्टाचार में शामिल नहीं रहा. राजनीतिक मतभेद तो रहे हैं, लेकिन वे कभी निजी दुश्मनी में नहीं बदले. हालांकि, मैं पार्टी के अंदर होने वाली सभी गलतियों को भी मान नहीं सका, लेकिन मैं उनका विरोध भी नहीं कर पाया. अपनी पूरी जिंदगी में, मैंने कभी किसी काम के बदले एक पैसा भी नहीं लिया."

    इस सुसाइड नोट में आशीष बनर्जी ने दावा किया कि तारापीठ- रामपुरहाट विकास प्राधिकरण में उनके पास बहुत कम अधिकार थे. उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें बदनाम करने और अपमानित करने की कोशिश की गई. उन कोशिशें की बुराई करते हुए, आशीष बनर्जी ने लिखा कि अब उन्हें लगता है कि राजनीति में आना एक गलती थी.

    परिजनों को राजनीति में नहीं आने की सलाह
    उन्होंने लिखा, "आम मीटिंग में शामिल होने के अलावा टीआरडीए में मेरी कोई जिम्मेदारी नहीं थी. मैं टेंडर कमेटी का सदस्य भी नहीं था. मेरे पास चेक साइन करने या लेने का कोई अधिकार नहीं था. मैं प्लान मंजूर करने या नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (एनओसी ) जारी करने में भी शामिल नहीं था. इन मामलों पर मुझे कभी किसी ने बात नहीं की. मुझे बदनाम करने और अपमानित करने के लिए जो कुछ भी किया गया, मैं उसकी कड़ी निंदा करता हूं. आज, मुझे लगता है कि राजनीति में आना एक गलती थी. मैं अपने परिवार के बच्चों को सलाह देता हूं कि वह राजनीति में न आएं. उन्हें अपने-अपने  प्रोफेशन में लगे रहने चाहिए."

    आशीष बनर्जी टीचिंग प्रोफेशन से भी जुड़े थे. उन्होंने सुसाइड लेटर में अपने स्टूडेंट्स को भी याद किया. उन्होंने लिखा, " मैंने पूरी जिंदगी पढ़ाया है. कभी कोई क्लास नहीं छोड़ी. मैंने स्पेशल क्लास ली और कई स्टूडेंट्स को निशुल्क पढाया. मुझे उनसे बहुत प्यार मिला."

    मेरी मौत के लिए कोई जिम्मेदार नहीं - आशीष बनर्जी

    फिर उन्होंने अपने परिवार वालों को अलग-अलग संबोधित किया और उन्हें शांत रहने की सलाह दी. सुसाइड नोट के आखिर में, आशीष बनर्जी ने लिखा कि उनकी मौत के लिए कोई भी जिम्मेदार नहीं है. उन्होंने लिखा कि राजनीति से जुड़े किसी का नाम नहीं लेना चाहता. किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कोई सीधा आरोप नहीं लगाया, न ही उन्होंने यह स्पष्ट किया कि किसने कथित तौर पर उन्हें अपमानित करने या बदनाम करने की कोशिश की.

    बता दें कि, पश्चिम बंगाल विधानसभा के पूर्व उपाध्यक्ष आशीष बनर्जी का शव बीरभूम जिले में तृणमूल कांग्रेस के कार्यालय में रविवार सुबह फंदे से लटका हुआ मिला. तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता आशीष बनर्जी 2001 से लेकर 2026 तक राज्य विधानसभा में रामपुरहाट  निर्वाचन क्षेत्र का लगातार प्रतिनिधित्व किया था. वह विधानसभा में उपाध्यक्ष रहे और पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पूर्ववर्ती  सरकार में  स्कूली शिक्षा एवं कृषि समेत विभिन्न विभागों के  मंत्री भी रहे. पुलिस अब इस बात की तहकीकात कर रही है कि क्या आशीष बनर्जी ने आत्महत्या की और यदि ऐसा है तो उन्हें किस वजह से यह कदम उठाना पड़ा.