• BRICS Summit 2026 में मोदी बोले - टेक्नोलॉजी और जरूरी खनिजों का 'हथियारीकरण' रोकना होगा

    BRICS Summit 2026 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने टेक्नोलॉजी और महत्वपूर्ण खनिजों के हथियारीकरण पर चिंता जताई. उन्होंने कहा कि इससे साझा विकास प्रभावित हो सकता है.

    नई दिल्ली, 14 सितंबर 2026। ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के समापन सत्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तकनीक और महत्वपूर्ण खनिजों के इस्तेमाल को लेकर बड़ी चिंता जाहिर की. उन्होंने कहा कि टेक्नोलॉजी और महत्वपूर्ण खनिज का हथियारीकरण दुनिया की साझा प्रगति में बाधा बन सकता है. प्रधानमंत्री ने BRICS देशों से आपसी सहयोग बढ़ाने और ऐसी तकनीक विकसित करने की अपील की, जिसका फायदा विकासशील देशों को भी मिल सके.

    भारत की अध्यक्षता में आयोजित दो दिवसीय ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के अंतिम सत्र का विषय लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता है. अपनी किताब में मोदी ने कहा कि ब्रिक्स की असली ताकत उसकी विविधता और आपसी सहयोग में है. उन्होंने किसी देश का नाम नहीं लिया, लेकिन उनकी टिप्पणी को चीन की उन नीतियों के संदर्भ में देखा गया, जिनके तहत दुर्लभ खनिजों और हाईटेक उपकरणों के निर्यात पर अलग-अलग समय पर प्रतिबंध लगाए गए हैं.

    प्रधानमंत्री ने कहा कि तकनीक और जरूरी खनिजों को हथियार की तरह इस्तेमाल करने से सभी देशों की प्रगति प्रभावित हो सकती है. इसलिए तकनीक को कुछ देशों तक सीमित रखने के बजाय इसके इस्तेमाल को ज्यादा समावेशी बनाने की जरूरत है.  

    ग्लोबल साउथ के लिए समाधान पर जोर
    मोदी ने कहा कि BRICS के सदस्य देशों की परिस्थितियां और जरूरतें अलग-अलग हैं, लेकिन सहयोग के जरिए सभी आगे बढ़ सकते हैं. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि BRICS में तैयार होने वाले समाधान केवल सदस्य देशों तक सीमित नहीं रहने चाहिए. इन्हें ग्लोबल साउथ के देशों की जरूरतों के मुताबिक अपनाने और इस्तेमाल करने योग्य बनाया जाना चाहिए.

    प्रधानमंत्री ने कहा कि विकासशील देशों का BRICS पर भरोसा इसलिए बढ़ा है क्योंकि इस समूह में उनकी आवाज सुनी जाती है और उनके अनुभवों को महत्व दिया जाता है. उनके मुताबिक, समाधान उनके लिए नहीं बल्कि उनके साथ मिलकर तैयार किए जाने चाहिए.

    दुनिया में बढ़ते तनाव और संघर्षों का जिक्र करते हुए मोदी ने कहा कि मौजूदा हालात का सीधा असर आम लोगों की जिंदगी पर पड़ रहा है. महामारी, जलवायु आपदाओं और सप्लाई चेन में आने वाली रुकावटों ने यह साबित किया है कि आज की जुड़ी हुई दुनिया में किसी एक क्षेत्र का संकट दूसरे हिस्सों को भी प्रभावित कर सकता है.

    बीमारियों और आपदा से निपटने के लिए नई पहल
    BRICS देशों ने संक्रामक बीमारियों से निपटने के लिए ब्रिक्स इंट्रीगेट अरली वॉर्गनिग सिस्टम पर सहमति जताई है. इसका मकसद बीमारियों के खतरे की समय रहते पहचान करना और जरूरत पड़ने पर तेजी से कदम उठाना है. आपदा प्रबंधन को बेहतर बनाने के लिए शुरुआती चेतावनी डेटा एकीकरण दिशानिर्देश भी तैयार की गई हैं. लॉजिस्टिक्स के क्षेत्र में ब्रिक्स लॉजिस्टिक्स सप्लाई चेन फ्रेमवर्क पर काम किया गया है. इससे सप्लाई चेन को ज्यादा भरोसेमंद और मजबूत बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है.