• तमिलनाडु में मंदिरों का धन धार्मिक कामों में होगा खर्च.. CM विजय ने पलटा स्टालिन सरकार का फैसला, 46 प्रोजेक्ट रद्द

    Tamil Nadu Temple Fund: तमिलनाडु में टीवीके सरकार की अगुवाई कर रहे सीएम विजय ने हिंदू संगठनों की एक बड़ी मांग का पूरा करते हुए डीएमके सरकार के फैसले को पलट दिया है। सीएम विजय की अगुवाई वाली राज्य सरकार ने साफ किया है कि मंदिरों का धन धार्मिक कार्यों पर ही खर्च होगा। मुख्यमंत्री विजय की इस फैसले के लिए सोशल मीडिया पर तारीफ हो रही है। पढ़िए, समाचार संपादक देहाती विश्वनाथ की यह विशेष रिपोर्ट..

    चेन्नई, 22 जून 2026। तमिलनाडु में करिश्माई जीत के बाद मुख्यमंत्री बने थलपति विजय ने एक बड़ा निर्णय लिया है। सीएम विजय ने पूर्ववर्ती एम के स्टालिन की अगुवाई वाली डीएमके सरकार के उस फैसले को पलट दिया है। जिसमें मंदिरों के फंड से 46 प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी गई थी। सीएम विजय की अगुवाई वाली टीवीके सरकार ने सभी प्रोजेक्ट को रद्द करते हुए कहा है कि मंदिरों की सभी चल और अचल संपत्तियों का इस्तेमाल सिर्फ पवित्र कामों में किया जाएगा। सरकार ने हिंदू धार्मिक और धर्मार्थ बंदोबस्ती विभाग में सुधार की दिशा में पहला कदम उठाया है। इसके तहत पिछली सरकार द्वारा मंज़ूर किए गए 46 प्रोजेक्ट्स को रद्द कर दिया गया है। इससे मंदिर दिवालिया नहीं होंगे। सीएम विजय के इस फैसले की तारीफ हो रही है।

    सीएम के मंजूरी के बाद आदेश जारी

    मुख्यमंत्री विजय की अनुमति के बाद शुक्रवार को देर रात यह आदेश जारी किया। जो अब काफी चर्चा में आ गया है। डीएमके सरकार ने मंदिर के फंड का इस्तेमाल करके 246 करोड़ रुपये की लागत से 29 मैरिज हॉल और 17 कमर्शियल कॉम्प्लेक्स बनाने की मंजूरी दी थी। आदेश में कहा गया कि इन 46 प्रोजेक्ट्स पर काम शुरू नहीं हुआ है। मंदिरों की आर्थिक स्थिति को देखते हुए इनकी मंजूरी रद्द की जा रही है। लंबे समय से हिंदू धार्मिक और धर्मार्थ बंदोबस्ती विभाग के तहत आने वाले मंदिरों से मिलने वाले फंड का इस्तेमाल मैरिज हॉल, शॉपिंग कॉम्प्लेक्स और शिक्षण संस्थान बनाने के लिए किया जाता रहा है।

    हिंदू संगठनों को सीएम विजय ने किया खुश

    कई दक्षिणपंथी और हिंदू संगठनों ने इस कदम पर आपत्ति जताई थी और कहा था कि मंदिर के फंड का इस्तेमाल सिर्फ मंदिर से जुड़े कामों के लिए ही होना चाहिए। उन्होंने मंदिरों को निजी लोगों को सौंपने की मांग के पीछे इसे एक कारण बताया था। टीवीके सरकार का यह फैसला अहम है क्योंकि यह राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर द्वारा विधानसभा में अपने पारंपरिक संबोधन में प्राचीन मंदिरों के प्रशासन को बेहतर बनाने के लिए हिंदू धार्मिक और धर्मार्थ बंदोबस्ती विभाग में संरचनात्मक सुधारों का वादा करने के दो दिन बाद आया है। राज्यपाल ने कहा था कि यह सरकार सुनिश्चित करेगी कि मंदिरों की सभी चल और अचल संपत्तियों का इस्तेमाल सिर्फ उनके पवित्र कामों के लिए हो। मुख्यमंत्री विजय की इस फैसले के लिए सोशल मीडिया पर तारीफ हो रही है।

    पलानीस्वामी ने भी उठाए थे सवाल

    डीएमके सरकार (2021-2026) ने मंदिरों के लिए रेवेन्यू जुटाने के मकसद से शॉपिंग कॉम्प्लेक्स और मैरिज हॉल बनाने के लिए मंदिर के फंड का इस्तेमाल किया था, जबकि मंदिर प्रशासन द्वारा चलाए जा रहे शिक्षण संस्थान पिछली एआईएडीएमक सरकारों के समय से ही मौजूद थे। हालांकि 2025 में एआईडीएमके के महासचिव एडप्पादी के. पलानीस्वामी ने कमर्शियल कामों के लिए मंदिर के फंड को खर्च करने की जरूरत पर सवाल उठाए थे। मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त कराने के लिए संघर्ष कर रहे कई दक्षिणपंथी संगठनों और कार्यकर्ताओं ने इस कदम का स्वागत किया है।