• अहमदाबाद में रीडिंग सेशन पर विहिप, बजरंग दल ने किया ' हमला,' मलाला, एनी फ्रैंक की किताबें फाड़ी

    आनंद निकेतन स्कूल में कैंटीन के खाने को लेकर शुरू हुआ विवाद और बढ़ गया जब हिंदुत्ववादी संगठनों ने मलाला यूसुफजई और एनी फ्रैंक की किताबों पर आपत्ति जताई. इसके बाद कथित तौर पर दक्षिणपंथी संगठनों से जुड़े लोगों ने वहां रीडिंग सेशन में शामिल लोगों के साथ बदसलूकी की. समाचार संपादक देहाती विश्वनाथ की विशेष रिपोर्ट:-

    अहमदाबाद, 29 अगस्त 2026. पिछले दिनों अहमदाबाद के एक स्कूल में "आई एम मलाला " और "द डायरी ऑफ़ अ यंग गर्ल " किताबें पढ़ाए जाने को लेकर विवाद हुआ था. किताबों के समर्थन में अहमदाबाद के वस्त्रापुर एरिया के औडा गार्डन में 27 अगस्त 2026 की शाम 4 से 6 बजे तक शांतिपूर्वक रीडिंग सेशन आयोजित किया गया था. तकरीबन 40 से 50 लोग वहां शांतिपूर्वक किताब पढ़ रहे थे. तभी बजरंग दल से जुड़े लोगों ने वहां पहुंचकर हाथापाई शुरू कर दी, किताब फाड़ दी और बदसलूकी की. 

    अहमदाबाद का स्टूडेंट्स और कलेक्टिव ग्रुप (एसवाईसीए ) एक जमीनी स्तर का  वॉलिंटियर संचालित सिविल नेटवर्क है. इसमें छात्र, शिक्षक, लेखक, एक्टिविस्ट और कानूनी पेशेवर जुड़े हुए हैं, ने इस रीडिंग सेशन आयोजित किया था. ग्रुप की ओर से दिए बयान के मुताबिक, बजरंग दल और विहिप से जुड़े होने का दावा करने वाले लगभग 30 से 40 लोग भगवा गमछों, बेसबॉल बैट और लाठियां के साथ वहां पहुंचे. कथित तौर पर उन्होंने नारेबाजी की, वहां किताब पढ़ रहे लोगों को धमकाया और सांप्रदायिक  टिप्पणियां की. आरोप है कि बजरंग दल के लोगों ने हिंसक होकर वहां मौजूद लोगों के साथ कथित तौर पर बदतमीजी की और कुछ महिलाओं के साथ बदसलूकी किए जाने का भी आरोप स्टूडेंट्स और कलेक्टिव ग्रुप की ओर से लगाए गए हैं.

    एसवाईसीए के सदस्यों ने मीडिया के साथ कुछ तस्वीरें शेयर की. इनमें फटी हुई किताबें और प्रतिभागियों को आई चोटें दिखाई दे रही है. उन्होंने बताया कि कम से कम 6 लोग हमले में घायल हुए हैं. दरअसल, दक्षिणपंथी संगठनों के लोग और रीडिंग सेशन में शामिल लोगों के बीच विवाद के समय कथित रूप से दक्षिणपंथी संगठन से जुड़े एक शख्स ने कमेंट किया, "इनकी पेंट खोलकर देख लीजिए कहीं मुस्लिम तो नहीं है." मामले में पीड़ित ने अहमदाबाद के वस्त्रापुर पुलिस थाने में बजरंग दल से जुड़े हीरेन रबारी और जिमित रबारी के खिलाफ प्राथमिकी भी दर्ज कराई है.

    आनंद निकेतन स्कूल से हुई विवाद की शुरुआत
    इस पूरे विवाद की शुरुआत 11 अगस्त को हुई. अहमदाबाद के शीलज इलाके में स्थित आनंद निकेतन स्कूल के कैंटीन में दिए गए भोजन में कथित तौर पर कांच के टुकड़े जैसा कुछ पदार्थ मिला था. इसे 8वीं कक्षा के एक छात्र ने निगल लिया था. बाद में उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया. इस छात्रा के माता-पिता ने स्कूल प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाते हुए इस मुद्दे को लेकर विरोध जताया था. हालांकि, कुछ ही दिनों में आनंद निकेतन स्कूल विवाद ने एक भयावह मोड़ ले लिया.

    विवाद में अब स्कूल की लाइब्रेरी में मौजूद "आई एम मलाला " और " द डायरी ऑफ अ यंग गर्ल. " जैसी 2 किताबें शामिल हो गई. बजरंग दल और विहिप जैसे हिंदू संगठनों ने आरोप लगाया कि मलाला, एक पाकिस्तानी एक्टिविस्ट है तो फिर उनकी किताब स्कूल की लाइब्रेरी में क्यों है? बस इसी मुद्दे को लेकर हिंदू कार्यकर्ताओं ने स्कूल परिसर में जाकर "जय श्री राम" के नारे लगाए. दक्षिणपंथी संगठन से जुड़े लोगों ने स्कूल के कैंपस में घुसकर नारेबाजी की और स्कूल के प्रबंधन को धमकाया. संभवत : इन लोगों की शिकायत स्कूल के कैंटीन के खाने की गुणवत्ता से अधिक स्कूल लाइब्रेरी में मौजूद किताबें थी.

    शिक्षा व्यवस्था के लिए चिंताजनक

    27 अगस्त की रीडिंग सेशन के दौरान हुई हिंसा की घटना से पहले भी स्टूडेंट्स और कलेक्टिव ग्रुप ने आनंद निकेतन स्कूल मुद्दे पर कड़ी प्रतिक्रिया जारी की थी. बयान के मुताबिक, इसे गुजरात और भारत की शिक्षा व्यवस्था के लिए चिंताजनक संकेत बताया गया. विवादित दोनों किताबों में से एक किताब मलाला यूसुफजई की आत्मकथा थी, जो लड़कियों की शिक्षा और अधिकारों के संघर्ष को सामने लाती है.