• कृष्ण जन्माष्टमी क्यों मनाई जाती है, जानिए इसकी पौराणिक कथा क्या है?

    जन्माष्टमी सिर्फ भगवान श्री कृष्ण के जन्म का उत्सव नहीं, बल्कि धर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक भी है. आखिर देवकी - वसुदेव को कारागार में क्यों बंद किया गया और नंद- यशोदा के घर कृष्ण के पहुंचने की पूरी कहानी क्या है? जानिए जन्माष्टमी से जुड़ी पौराणिक कथा. समाचार संपादक देहाती विश्वनाथ की यह विशेष रिपोर्ट..

    हैदराबाद, 4 सितंबर 2026. श्री कृष्ण जन्माष्टमी हिंदू धर्म के पर्वों में से एक है. भाद्र कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को भगवान श्री कृष्ण के जन्मोत्सव के रूप में यह पर्व मनाया जाता है. धार्मिक मान्यता के मुताबिक, इसी तिथि की आधी रात को मथुरा के कारागार में देवकी और वसुदेव के पुत्र के रूप में भगवान श्री कृष्ण ने जन्म लिया था.

    कंस का बढ़ता अत्याचार
    द्वापर युग में मथुरा पर राजा उग्रसेन का शासन था. उनका पुत्र कंस बेहद अत्याचारी था. कंस ने अपने पिता को गद्दी से हटाकर मथुरा पर अधिकार कर लिया और प्रजा पर अत्याचार करने लगा. हालांकि, अपनी बहन देवकी से वह बहुत प्रेम करता था, लेकिन उसी बहन को कंस ने बहुत कष्ट भी दिए. देवकी का विवाह यदुवंशी सरदार वसुदेव से हुआ था. बड़े अरमानों से कंस ने देवकी का विवाह कराया और विवाह के बाद कंस ने स्वयं देवकी और वसुदेव को उनके घर पहुंचने के लिए रथ को लेकर निकला. तभी आकाशवाणी हुई कि जी बहन को वह इतने प्रेम से विदा कर रहा है उसकी आठवीं संतान कंस के वध का कारण बनेगी. यह सुनकर कंस क्रोधित हो गया और वसुदेव को करने के लिए आगे बढ़ा. तब देवकी ने कंस से अपने पति का जीवन बख्शने की बिनती की और वचन दिया कि उनकी जो भी संतान होगी, उसे वह कंस को सौंप देगी.

    कंस ने अपनी बहन की बात मान तो ली, लेकिन देवकी और वसुदेव दोनों को कारागार में डाल दिया. देवकी और वसुदेव की 7 संतानें हुई और एक-एक करके उनके मामा कंस ने जन्म लेते ही उन सभी नवजातों की हत्या कर दी. लेकिन जब आठवीं संतान के जन्म का समय आया तो कारागार की सुरक्षा और भी कड़ी कर दी गई. इसी दौरान गोकुल में नंद की पत्नी यशोदा भी संतान को जन्म देने वाली थी.

    आधी रात को कृष्ण ने लिया जन्म

    भाद्र कृष्ण पक्ष की अष्टमी की आधी रात को देवकी ने भगवान विष्णु के आठवें अवतार श्री कृष्ण को जन्म दिया. धार्मिक मान्यता के मुताबिक, उस समय भगवान विष्णु चतुर्भुज स्वरूप में देवकी और  वसुदेव के सामने प्रकट हुए. उन्होंने बताया कि वे मानव रूप में अवतार लेकर कंस की अत्याचार का अंत करने आए हैं और वसुदेव से उन्हें गोकुल में नंद - यशोदा के पास छोड़ आने को कहा. इसके पश्चात भगवान ने नवजात शिशु का रूप धारण कर लिया. उसी समय कारागार के पहरेदार मूर्छित हो गए और उसके द्वारा अपने आप खुल गए. वसुदेव बालक कृष्ण को सूपा में रखकर गोकुल की ओर चल पड़े. भारी बारिश के चलते उस समय यमुना नदी उफान पर थी.

    वसुदेव जब बालक कृष्ण को लेकर यमुना में उतरे, तब भगवान के चरणों का स्पर्श होते ही यमुना का जल शांत हो गया और उनके लिए रास्ता बन गया. वसुदेव गोकुल पहुंचे और नंद के घर जाकर बालक कृष्ण को यशोदा के पास सुला दिया. तत्पश्चात  वे वहां जन्मी कन्या को लेकर मथुरा के कारागार में लौट आए. प्रातः काल जब कंस को देवकी के आठवें बच्चे के जन्म की सूचना मिली, तो वह अत्यंत क्रोध में धधकता हुआ उस शिशु कन्या की हत्या करने कारागार पहुंच गया. निर्मम कंस ने कन्या को देवकी की गोद से छीनकर उसे पत्थर पर पटकने का प्रयास किया, लेकिन कन्या उसके हाथ से निकल कर आकाश की ओर चली गई. उसने कंस को चेतावनी दी कि उसका वध करने वाला जन्म ले चुका है और गोकुल में नंद के घर पहुंच चुका है.

    कृष्ण ने किया अत्याचारी कंस का अंत

    आकाशवाणी सुनकर कंस और क्रोधित हो गया और उसने कृष्ण को  मारने के लिए कई राक्षसों को भेजा लेकिन सभी के प्रयास विफल रहे. आगे चलकर युवा अवस्था में श्री कृष्ण ने कंस का वध किया और मथुरा के लोगों को उसके अत्याचारों से मुक्ति दिलाई. भगवान कृष्ण ने अपने जीवन में अनेक लीलाएं की और महाभारत में अर्जुन को गीता का उपदेश देकर संसार को धर्म और कर्म का मार्ग दिखाया.