• कवर्धा के बैगा आदिवासी पुराने आशियाने तोड़ दिए, आवास पूरा नहीं होने के चलते दूसरों के मकानों में रहने को मजबूर

    कवर्धा, 9 सितंबर 2026। कवर्धा जिले के वनांचल क्षेत्र से एक बार फिर सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन पर सवाल खड़े करने वाली तस्वीर सामने आई है। बोड़ला विकासखंड के ग्राम पंचायत आमानारा के आश्रित गांव झूरगीदादर में कई बैगा परिवारों के प्रधानमंत्री आवास पिछले करीब दो वर्षों से अधूरे पड़े हैं। हितग्राहियों का आरोप है कि आवास की राशि की किस्त जारी होने के बाद पंचायत स्तर पर निर्माण की जिम्मेदारी ली गई, लेकिन कई मकानों में सिर्फ नींव और कॉलम खड़े करने के बाद काम बंद कर दिया गया। अब ग्रामीण अपने अधूरे आशियाने को पूरा कराने के लिए जनपद पंचायत से लेकर कलेक्ट्रेट तक चक्कर काट रहे हैं।

    ये तस्वीरें हैं कवर्धा जिले के बोड़ला विकासखंड के ग्राम पंचायत आमानारा के आश्रित गांव झूरगीदादर की... जहां बैगा आदिवासी परिवारों के पक्के मकान का सपना आज भी अधूरा है। ग्रामीण आवास योजना के तहत बनने वाले आवास के चलते अपने पुराने आशियाने तोड़ डाले आवास पूरा नहीं होने के चलते दुसरो के मकान में रहने को मजबूर। ग्रामीणों के मुताबिक, करीब दो साल पहले उन्हें आवास स्वीकृत होने की जानकारी मिली। उम्मीद जगी कि अब कच्चे और जर्जर घरों से निकलकर उनका परिवार पक्के मकान में रहेगा। लेकिन आरोप है कि आवास निर्माण के लिए राशि की किस्तें जारी होने के बाद कई मकानों में सिर्फ नींव और कॉलम खड़े किए गए और उसके बाद निर्माण कार्य बंद हो गया।

    हितग्राहियों में फतेरा राम बैगा, सुखू बैगा, संतू बैगा, जोधसिंह बैगा और फिरतू बैगा सहित अन्य ग्रामीण शामिल हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि ग्राम पंचायत के सरपंच ने हितग्राहियों के आवास ठेके पर बनवाने की बात कही थी। इसके बाद आवास की दो किस्तें निकलने के बावजूद मकानों का निर्माण पूरा नहीं कराया गया। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि होना अभी बाकी है।

    अधूरे मकानों के बीच ग्रामीणों की परेशानी सिर्फ आर्थिक नहीं है। बरसात के मौसम में परिवारों को रहने के लिए काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
    ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने अपनी शिकायत जनपद पंचायत और जिला प्रशासन तक पहुंचाई है, लेकिन अब तक निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ।
    इधर, जिले के वनांचल और बैगा बहुल क्षेत्रों में सरकारी योजनाओं के लाभ को लेकर प्रशासन की ओर से लगातार प्रयास किए जाने की बात कही जाती रही है। ऐसे में झूरगीदादर के इन अधूरे आवासों की स्थिति व्यवस्था के जमीनी क्रियान्वयन पर सवाल खड़े करती है।