• कोरबा में रील देखते-देखते गया नेटवर्क, गुस्से में महिला ने पटककर तोड़ा फोन, फिर पी लिया जहर

    कोरबा जिले के केराकछार गांव में 52 साल की मंगलो बाई की मौत रील्स देखने की लत के कारण हो गई. शनिवार को जब वह खाना खा रही थीं, तो नेटवर्क कनेक्शन कटने की वजह से वीडियो चलना बंद हो गया. गुस्से में आकर महिला ने कीटनाशक पी लिया. इस घटना से इलाके में सनसनी फैल गई है.
    कोरबा, 9 सितंबर 2026। छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले से एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है. यहां केराकछार गांव की एक महिला ने रील्स देखने की लत और नेटवर्क कनेक्टिविटी की समस्या से परेशान होकर आत्महत्या कर ली. दरअसल, मजदूर प्रेमलाल सारथी की 52 वर्षीय पत्नी मंगलो बाई को अपने मोबाइल फोन पर रील्स और टीवी सीरियल देखने की बुरी लत थी. दोपहर का खाना खाते समय अचानक नेटवर्क चला गया, जिससे वह जो रील देख रही थी वह रुक गई. लंबे समय से नेटवर्क न होने से परेशान होकर उसने गुस्से में आकर अपना मोबाइल फोन जमीन पर पटक दिया. इसके बाद, उसने खुद को एक कमरे में बंद कर लिया और कीटनाशक पी लिया.

    यह घटना शनिवार दोपहर की है, जब महिला खाना खाते समय अपने मोबाइल पर रील्स देख रही थी, तो नेटवर्क कनेक्शन चला गया. रील्स न चलने से परेशान होकर उसने गुस्से में फोन जमीन पर फेंक दिया. इसके बाद वह एक कमरे में गई और खुद को अंदर बंद कर लिया और कीटनाशक पी लिया. जब उसके पति को इस बात का पता चला, तो उसने उसे उल्टी कराने के लिए गोबर पानी पिला दिया.  लेकिन उसकी हालत में कोई सुधार नहीं हुआ. जिसके बाद परिवार वाले उसे करतला हेल्थ सेंटर ले गए, जहां से उसे मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया. इलाज के दौरान रविवार को उसकी मौत हो गई.

    जानिए पूरा मामला
    जानकारी के मुताबिक, प्रेमलाल सारथी केराकछार गांव का रहने वाला है. वह मजदूरी करके अपनी पत्नी 52 साल की मंगलो बाई और 3 बच्चों का पेट पालता है. घर वालों ने बताया कि मंगलो को मोबाइल पर रील और सीरियल देखने की बहुत आदत थी. शनिवार दोपहर करीब 12 बजे वह खाना खाते हुए रील देख रही थी. तभी अचानक मोबाइल का नेटवर्क चला गया. इससे वह बहुत गुस्सा हो गई. गुस्से में उसने मोबाइल फेंक दिया और कमरे में चली गई.कुछ देर बाद उसे उल्टियां होने लगीं. पहले घर वालों को लगा कि तबीयत खराब है, लेकिन उल्टी में से तेज बदबू आ रही थी. शक होने पर जब कमरे में देखा तो वहां कीटनाशक की खाली शीशी पड़ी थी. तब पता चला कि उसने गुस्से में जहर पी लिया है. इसके बाद परिवार वाले तुरंत उसे अस्पताल ले गए.

    एक्सपर्ट ने बताई मोबाइल लत की सच्चाई
    मोबाइल की लत को लेकर मनोरोग विशेषज्ञों का कहना है कि, आजकल माता-पिता काम में बिजी रहते हैं, इसलिए बच्चों को चुप कराने या व्यस्त रखने के लिए मोबाइल दे देते हैं. धीरे-धीरे यही मोबाइल उनका सबसे अच्छा दोस्त बन जाता है.  ऐसे में जब किसी बच्चे से मोबाइल छीन लिया जाता है या ज्यादा मोबाइल चलाने पर उसे डांटा जाता है, तो उसे बहुत बुरा लगता है. कई बच्चों में अकेलापन, चिड़चिड़ापन और तनाव बढ़ने लगता है. ज्यादा तनाव में कुछ बच्चे गलत कदम भी उठा लेते हैं. इसलिए विशेषज्ञों का कहना है कि परिवार को बच्चों को डांटने की बजाय उनसे प्यार से बात करनी चाहिए और समझना चाहिए कि वे परेशान क्यों हैं.