घर की चौखट पर पड़ी पिता की लाश, दो बीघा जमीन के लिए बहन से लड़ते रहे भाई, 35 घंटे बाद हुआ संस्कार
झांसी के चिरगांव खुर्द में दो बीघा जमीन के विवाद के कारण बेटों ने पिता के अंतिम संस्कार से इनकार कर दिया. बहन द्वारा जमीन लौटाने की सहमति, रजिस्ट्रार कार्यालय में सर्वर डाउन और तेज बारिश के कारण 35 घंटे का समय लगा. हालांकि, पुलिस की समझाइश के बाद समथर मुक्तिधाम में अंतिम संस्कार हुआ.समाचार संपादक देहाती विश्वनाथ की यह विशेष रिपोर्ट:
झांसी, 19 अगस्त 2026. यूपी के झांसी में एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है. यहां दो बीघा जमीनी विवाद के चक्कर में एक बुजुर्ग व्यक्ति का अंतिम संस्कार 35 घंटे तक रुका रहा. इसके बाद जब विवाद का निपटारा हुआ तब जाकर कहीं बेटों ने अपने पिता का अंतिम संस्कार किया. अब यह मामला इलाके में चर्चा बनी हुई है.
भाई - बहन का विवाद, पिता का लाश फंसा
पूरा मामला झांसी के समथर पुलिस इलाके के चिरगांव खुर्द का है . यहां के रहने वाले ठाकुरदास कुशवाहा के दो बेटे और तीन बेटियां हैं एवं उनके पास 5 बीघा जमीन है. बताया जा रहा है कि ठाकुरदास के पिता की तबीयत खराब रहती थी. जिस कारण उनकी दूसरे नंबर की बेटी अंगूरी उसे अपने साथ ले गई और उसका इलाज कराया. इसी दौरान पिता ने अपनी दो बीघा जमीन बेटी अंगूरी के नाम कर दी . इस बीच पिता का देहांत हो गया और बेटी उसके शव को लेकर चिरगांव पहुंच गई.
जमीन के चक्कर में रुका रहा अंतिम संस्कार
गांव में बेटों ने पिता का अंतिम संस्कार करने से यह कहते हुए मना कर दिया कि जब तक बहन जमीन को मुझे वापस नहीं करती, तब तक वह अंतिम संस्कार नहीं करेगा. आखिर में बहन उक्त जमीन को वापस करने को तैयार हो गई और भाइयों को लेकर मोठ स्थित रजिस्ट्रार कार्यालय पहुंची, जहां ओटीपी नहीं आने के कारण रजिस्ट्री नहीं हो सकी. हालांकि शाम तक अंतिम संस्कार की तैयारी कर ली गई थी, लेकिन किसी कारणवश अंतिम संस्कार नहीं हो सका. अगले दिन सुबह अंतिम संस्कार करने की बात तय हो गई.
फिर भी नहीं हो सकी जमीन की रजिस्ट्री
अगली सुबह दोनों भाई अंतिम संस्कार से पहले बहन को लेकर फिर रजिस्ट्रार कार्यालय पहुंचे, लेकिन सर्वर डाउन के चलते उस दिन भी रजिस्ट्री नहीं हो सकी. निराश होकर दोनों भाई शाम को घर लौटे और अंतिम संस्कार की तैयारी शुरू कर दी. इसी दौरान अचानक तेज बारिश शुरू हो गई. परिजनों के मुताबिक, गांव में मुक्तिधाम नहीं होने के कारण मृतक को करीब पांच किमी दूर समथर कस्बे स्थित मुक्तिधाम ले जाया गया और तब जाकर हुआ ठाकुरदास का अंतिम संस्कार. इस मामले को लेकर जब समथर पुलिस प्रभारी अतुल राजपूत से पूछा गया तब उन्होंने बताया कि सूचना पर थाने की पुलिस टीम मौके पड़ गई और दोनों भाई - बहनों को समझ कर शव का अंतिम संस्कार कराया गया.